Uttarakhand

बूढ़ा केदार के कोट गांव में पहाड़ी खिसकने से मलबे की चपेट में आए छह आवासीय भवन, घरों में बंधे सात मवेशी भी हुए दफन

नई टिहरी। बालगंगा तहसील में मध्य रात्रि से हो हुई मूसलाधार बारिश के कारण बूढाकेदार के कोट गांव में पहाड़ी खिसकने से गांव के छह आवासीय भवन मलबे में दब गये। मलबे के कारण घरों में बंधे सात मवेशी भी दफन हो गए। प्रभावित ग्रामीणों को प्रशासन की टीम ने अन्यत्र घरों में शिफ्ट कर हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। बुधवार सुबह करीब नौ बजे के आसपास कोट गांव के ग्रामीण में नाशता खाने के बाद काम धंधे पर जाने की तैयारी में जुटे थे, कि तभी अचानक तेज गति से पहाड़ी से मलबा गांव की ओर आया, जिससे ग्रामीणों में अफरा तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे, जिससे जनहानि होने से बच गई। ग्रामीण दीपक, सुंदर सिंह और गोपाल लाल के आवासीय भवन पूरी तरह मलबे में दब गए, जिसके कारण घरेलू सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गए।

साथ ही गोपाल लाल की दो गाय, एक जोड़ी बैल तथा तीन बछड़े भी मलबे में दब गए। इसके अलावा ग्रामीण उम्मेंद सिंह,जयेंद्र लाल और देवदास के घरों में भी मलबा आने से पूरा घरेलू सामान नष्ट हो गया। सूचना पर एसडीएम घनसाली केएन गोस्वामी,तहसीलदार महेशा शाह ,लोनिवि,विद्युत और पशुपालन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर प्रभावितों परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट किया। घटना से ग्रामीणों में दहशत बनी है, आपदा से हुए नुकासन के कारण प्रभावित परिवार सदमे में है। उन्होंने बताया अभी भी पहाड़ी से भूस्खलन जारी है, जिस कारण गांव के अन्य परिवारों में भी दहशत बनी है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हिम्मत रौतेला ने बताया कि वर्ष 2019 और 2000 में भी गांव के ऊपर पहाड़ी खिसकने से बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी है, वर्ष 2019 में छह तथा 2000 में चार लोगों की की मौत हो गई थी।

ग्रामीण मनोज लाल ने बताया कि तभी से गांव को विस्थापित करने की ग्रामीण मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक शासन प्रशासन की ओर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। क्षेत्रीय विधायक शक्तिलाल शाह भी घटनास्थल पर पहुंचे, उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट कर उन्हें आवश्यक खाद्य सामग्री के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध करने के निर्देश दिये है। उन्होंने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बताया ग्रामीण और प्रशासन की टीमें घरों में आये मलबे को हटाने काम में जुटी है। भारी बारिश से बालगंगा और भिलंगना नदी भी ऊफान पर हैं।

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